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| Image Courtesy : artiumvisuals |
Finding The Universe
हमारे जिदंगी में सबसे एहम जो लोग होते है उन्ही लोगो में से एक मेरे लिए मेरी
दादी जी थी जिनके साथ में सबसे ज्यदा समय बिताता था अपनी अच्छी बुरी सारी बाते
बताता था | दादी जी के जाने के बाद सब कुछ बदल सा गया था | भगवान जी भी अक्सर वो
ही लोगों को चुनते है जो लोग हमारे दिल के करीब होते हैं || पहले मितु और अब दादी
जी लेकिन भगवानजी जो भी दर्द देते हैं उन्हें सह ने की शक्ति भी वो ही देते हैं वो
कहते हैं न “ More pain ,
More gain ” जितना दर्द मिलेगा उतना ही हम मजबूत होंगे | because giving up isn’t an
option we have to face every phase of our critical situations.
बस यही खुदसे समज कर आगे बढ़ ता गया क्यूंकि जब कही से
आवाज नही आती या फिर जब कोई होता नहीं तोह में हमेशा ही खुदसे मोटिवे लेकर आगे
बढ़ता हूँ ||
कोई सही सलाहें नही देता हैं और अगर सही सलाह दे भी
दे तो आखिर में करना तो हम्हे ही, हमको हमारे अलवा कोई बेहतर नही जान सकता, जो दिल
से आवाज आए वही करना चाहिए क्यूंकि वही सलाह आगे जा कर हम्हे गलत साबित नही करेंगी
||
तो बस वही आवाज़ सुन कर आगे की पढाई शुरु करदी, सपने
तोह देखे थे | बहुत से लेकिन कभी कभी हम्हे कुछ सपने को पीछे छोड़ कर आगे बढ़ना पड़ता
हैं | और यही से मेरी जिंदगी का दूसरा पढ़ाव शुरु हुआ ||
कॉमर्स में एडमिशन ले लिया था , सपना तोह साइंस का था
लेकिन बाद में साइंस के बारे में बहुत कुछ चीजे पता चली दोस्तों से और पहले से ही
मैथ्स और साइंस से मेरी कितनी अच्छी दोस्ती हैं वोह तो सबको पता है ही , आगे जा कर
क्या करेंगे क्या नहीं कुछ सोचा भी नहीं था और सबका जवाब बस यही था की जो भी होगा
“ I’ll manage ”.
पहला दिन था स्कूल का लेकिन बस बदलना एक क्लासरूम ही
था क्यूंकि हमारे ही स्कूल में पढना था, भले ही स्कूल एक था लेकिन नियम बहुत अलग
अलग || सही से यूनिफार्म पहनना , बालो को सहीं से ओड़ना हाला की मुझे आज तक बालो को
सही से ओडना नही आए | बस माथे पर हाथ फेर दिया और हो गये तैयार ||
पता नही जब भी आगे पढने को जाओं तोह सब मार्क्स क्यूँ
पूछते हैं , एक तो बहुत मेहनत कर के पास हुए हो और ऊपर से मार्क्स पूछ कर सबके
सामने बेज्जत करते है , अब तो पहले की तरह 94 तोह आए नही जो सबके सामने सर तारीफों
के पुल बांधेंगे || पहले दिन ही इज्जत की लग गयी जब सर ने वही सवाल फिरसे दोहराया
की 10 में कितने मार्क्स आए ? अरे क्यूँ उस लम्हे को याद करना जहा सिर्फ और सिर्फ
दुःख और दर्द हो || लेकिन फिर भी उन्ही ज़ख्मो पर नमक छिडक दिया |
अब हो जाव तैयार विवान बेटा अपनी धुल जैसी इज्जत के
कंकर करने को, थोड़ी बहुत हिम्मत दिखा कर बोल दिया की 56 मुझे लगा था की सिर्फ में
ही इतने अच्छे मार्क्स वाला अकेला होंगा लेकिन यहाँ तोह मेरे से भी कही दुरंधर लोग
बैठे थे जो 10 में २ से तिन जा कर आए हो || उस दिन पहली बार खुद पर नाज हुआ की
विवान जी आप अकेले नही हो इन रेस में बहुत से लोग है अब बचपने से बहार निकल कर
दुनिया जो बस जीना था उस दुसरे दिन अहसास हुआ की प्यार के अलवा भी बहुत कुछ हैं
जिंदगी में जीने के लिए || जब क्लास में एक सुन्दर सी मैडम जी पढ़ाने आए बस पहली ही
नजर में उनपे क्रश आ गया || क्रश भी एसा की बस जब भी मेडम क्लास में पढ़ाने आए तब
तक बस कुछ सुजता ही नहीं बस दिल करता है उन्हें ही देखते रहे और बस वो ही विषय
हमारा प्रिय हो गया दो तिन बार थप्पड़ भी खा चुके है क्यूंकि में अक्सर सपने में
खोया रहता था लेकिन उनके हाथो की मार भी सेह्द सी थी, मारने के बहाने चलो छुआ ही
सही ||
करीब करीब एक महिना हो गया था लेकिन अब भी कोनसा विषय
क्या है क्या नही वो तक पता नहीं था बस रोज रोज सर पढ़ाने आते और चले जाते थे |
सोचा था की मैथ्स से पीछा छुट गया लेकिन यहाँ पर भी उसका एक बड़ा भाई आ गया था और
उसके साथ फ्री में उनका एक और भाई भी था एकाउंट्स || अगर एक भी एंट्री ठीक से आ
जाती तोह भी अफ़सोस नहीं था चाहे जितना भी दिमाग लगा लो कुछ भी दिमाग में घुसता ही
नहीं था | ट्यूशन भी लगवाया था लेकिन वहां भी कुछ समज नहीं आता था और उपर से एक
नियम लाए थे टीचर जी की सबको अलग अलग एंटरी लिखनी हैं वो भी बोर्ड पर मेरी बारी
आने पर इतना बेज्जत हुआ जितना कभी नही हुआ आजतक और उपर से मेरे फेसले पर उंगलिया
उठी वो अलग से “ आखिर किसको पूछ कर एडमिशन लिया ?“ अब मैंने उसपे भी सैवेज जवाब दे
कर थप्पड़ खा लिया | अब इतना भी कुछ खास नही बोला था बस जवाब में था की “ मैडम जी
उसपे पूछना क्या मन किआ तोह ले लिया अब उसके लिए किसी को पूछना क्या है ” अब इसमें
कोई बत्तमीजी वाली बात है कोई ?
अब मोबाइल फ़ोन से कुछ ज्यदा ही लगाव हो गया था
क्यूंकि एक नया ट्रेंड आया था और उसिपे बात करने की मजा बहुत आती थी और मुझे उस
वक्त एक नया सोख चड़ा था दुसरे देसों के लोगो से बात करने का तोह रोज रोज नये नये
दोस्त बना कर बाते किआ करता था और उन्ही में से एक दोस्त बनी थी नाम भी इतना अजीब
था की बात करने में भी बहुत मुश्केलिया होती थी || दो दिन हुए उससे दोस्त बन ने के
और उसने सीदा गर्ल फ्रेंड बन ने की बात कर दी मैंने भी हा बोल दिया चलो देखते है
क्या होता हैं और हमारी थोड़ी बहुत इंग्लिश भी सुधर जाएगी ||
नाम था लड़की का एल्मिना | एल्मिना से शुरु हुआ हमारा
सोना बाबु का सफ़र , सब ही रिलेशनशिप की तरह यह भी पहले पहले सेहद सी लग रही थी
लेकिन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप पहले पहले तो इतना कैरिंग दिखाया और बादमे नागिन
ने जेहर उगल दिया , अब उससे छोड़ जाने को बस एक बहाना चाहिए था क्यूंकि उसका एक और
बॉय फ्रेंड था इंडोनेशिया में उस वक्त हमारे इंग्लिश में बहुत सी गड बड़ी थी में
उससे बात करने के लिए एक और एप्लीकेशन का यूज़ करता था जो हिंदी को इंग्लिश में
बदलता था | इतने दिन बात करने की वजह से थोडा बहुत तो आता था बस कुछ हमारा बस कुछ
इंग्लिश शब्द की वजह से टूट गया कहना था कुछ और लिख दिया कुछ और बाद में उसकी
प्रोफाइल ठीक से देखने के बाद पता चला की हमारा काट लिया इसने तब पता चला की काटने
का मतलब क्या होता था और हमारे लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप का अंत एक ही महीने की
अंदर हो गया || 💔
To be Continued

Very nice
ReplyDeleteSuper
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