अल्फाज़

 तु ख़ुद की खोज में निकल ,
तु किस लिए हताश है , 
तू चल ,
तेरे वजूद की समय को भी तलाश है ।। 


कैसे बताऊँ किस मुश्किल से आ पहुंचा हूँ.. एक तेरे साथ चलकर, मंज़िल तक आ पहुंचा हूं!   


तुम्हारी ज़िद, तुम्हारे उसूल, तुम्हारे नियम, कौन जाने कौन से संविधान की धारा हो तुम... 


नया दिन हैं, नई बात करेंगे

कल हार कर सोए थे

आज फिर नई शुरुआत करेंगे ।। 


 अभी उनका वक्त है, मुझे जरा और

आजमाने दो, वो रो-रोकर पुकारेंगे मुझे,

 जरा सफलता तो पाने दो ।। 


जानने वाले तो बहुत मिलेंगे इस जहां में, 

अगर तुम 'समझ' सको तो,

बात आगे बढ़ाएं ! 


रात रात भर जाग कर,

पढना शुरूकर दो,

क्योंकि किस्मत के सितारे तभी चमकेंगे,

जब नींद अधूरी होंगी। 


 आए हो निभाने को जब किरदार जमीं पर

कुछ ऐसा करके चलो कि ज़माना मिसाल दे !


प्यार दो तो प्यार मिलेगा,

लेकिन कब मिलेगा ये नही कहा किसी ने..... 


मुड़कर पीछे ना देख ,

जो छूट गया वो तेरा था ही नहीं । 


 भरोसा तो अपनी सांसो पर नहीं है यार

और तुम इंसानों पर कर लेते हो ।।


 एक दिन सिकायत तुम्हे वक़्त से नहीं खुद से होगी , की जिंदगी सामने थीं और

तुम दुनिया मैं उलझे रहे ।


असलियत देख शरीफों की

मुझे अपने गुनहगार होने पर गुरूर आया ।। 


 दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे ही होगा 

ख़फ़ा ज़रूर हूँ पर बेवफ़ा नहीं ।।


 तुम जाने दो सबको तारो के शहर में,

तुम मेरे साथ ' केदारनाथ ' चलना ।।


जिसे सोचकर ही चेहरे पर ख़ुशी आ जाए वो खुबसूरत एहसास हो तुम । 


 कितना कमाते हो..? के बजाय, कितना ख्याल करोगे...? पूछ लिया होता.

तो शायद शादी

के बाद तलाक

नही होता......!


 बाहर लोग फ़िदा है जिस पर

वही हंसी बेजान है घर में..


ऐ वक़्त ले चल उस बचपन में जहाँ ना कोई जरूरत थी, ना कोई जरूरी था.! 


 इन अधरों को छूकर ये निगाहें भी बस यूँही लौट आती है इश्क़ में ये शराफ़त हम पर ग़ज़ब का सितम ढाती है . ...


दिल साफ रखो 

हिसाब कमाई का नहीं,

कर्मो का होगा ।। 


हम जुठो के बीच में

सच बोल बैठें,

नमक का शहर था

और हम जख्म खोल बैठें  


 बैठकर खामोश अब,

अब तुम्हे आजमाएंगे,

देखते हैं अब हम तुम्हे,

कब याद आयेंगे


तुझे गुरूर किस बात का है,

मरने के बाद तेरे अपने भी छूकर हाथ धोएंगे। 💔 


चाहता हूँ उसे मैं अभी भी उसी नज़र से,

बस वो बेख़बर रहे अब इस ख़बर से। 😊


इज्ज़त की ख़ाक भी मंजूर है

भीख में आसमान भी ना लूं....  💗


तरसते है लोग कि कोई सच्चा फिक्रमंद हो, वरना कौन ठीक होता है यू हाल पूछने से 🙂🖤


हम अक्सर हंसा देते हैं उदास लोगों को हम से हम जैसे लोग देखे नहीं जाते ! ☺️


सांवला है रंग थोड़ा कड़क मिजाज है, सुनो तुम पसंद हो हमें तुम्हारा चाय सा स्वाद है 💗☄️😍


दूसरी मोहब्बत अक्सर उसी से होती हैं,

जिसे आप पहली मोहब्बत का रोना सुना रहे होते हैं. 🙂


संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

इक धुँद से आना है इक धुँद में जाना है 👼


पता है कंधों से एक दिन फरिश्ते उड़ जायेंगे 

मगर यह दुख है कि मायूस हो कर उड़ जायेंगे

तेरी मढेर पे कब तक सहेंगे फाक ह कसिह

हम एक रोज़ यूंही बैठें बैठे उड़ जाएंगे

सकून से रेहने दे किसने हमेशा रेहना है

सब अपने बच्चों को उड़ाना सीखा कर उड़ जायेंगे 


जिंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं 

और क्या जुर्म है पता ही नहीं


इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं 

मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं


जिंदगी मौत तेरी मंज़िल है

दूसरा कोई रास्ता ही नहीं


जिसके कारण फ़साद होते हैं

उसका कोई अता-पता ही नहीं


कैसे अवतार कैसे पैग़मबर

ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं


जिंदगी की तल्खियाँ अब कौन सी मंज़िला पाएं

इससे अंदाज़ा लगा लो ज़हर महँगा हो गया


जिंदगी अब बता कहाँ जाएँ

ज़हर बाज़ार में मिला ही नहीं


सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे

झूठ की कोई इंतहा ही नहीं


धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून 

अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं


चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो 

आईना झूठ बोलता ही नहीं


अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है

 'नूर' संसार से गया ही नहीं 


हमने सनम को खत लिखा ...

लेकिन कबूतर हरामी था,उसके बाप को दे आया।  😂😂


अब  हम ने भी 

कलम रखना सीख लिया है ,

जिस दिन भी कोई कहेगा कि हम तुम्हारे हैं ,

दस्तखत करवा लेंगे। । 💓😏


क्या खता हमसे हुई कि खत आना 

बंद है


आप है हमसे ख़फ़ा या डाक-खाना 

बंद है........🥀 


फ़लक तक साथ चलने की दुआ बाद में कीजिए , 

ज़िन्दा हूँ जमी पर  मैं पहले यहां तो वफ़ा कीजिए ।। 😈


ग़ैरों को भी कर रहे हो 

मोहब्बत के इशारे .. 

सुनो .. 

मेरी तौहीन के लिए ये नजारा काफ़ी हैं .. !!  💫


तेरी चाहतों  की जो  जंजीर थी  वो तोड़ दी हमनें 

अब से जल्दी सोया करेंगे मोहब्बत छोड़ दी हमने 😊


दिल क़ी धड़कनों में अचानक ये इज़ाफ़ा कैसा, 

उनके होंठों पे कहीं नाम हमारा तो नहीं... 😍💘


तेरी मोहब्बत की तलब थी,

तो हाथ फैला दिए,

वरना हम तो अपनी ज़िन्दगी, 

के लिए भी दुआ नहीं करते 💘


खुद से अनजान हूँ मैं,

ये जहाँ क्या जानेगा मुझे 😌 


कितना अजीब हैं ना तेरे आशिकी का सफर


फूलो से लेकर , सिगरेट के धुए तक ❤💫

2 Comments

  1. Loved your site !! keep it up bhai

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    1. Thank you so much for appreciation our work brother :)

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