Tangled Eternity

स्कूल की पढ़ाई ख़तम कर ली , बोर्ड्स के पेपर भी ख़तम करके रिज़ल्ट का ही इंतजार हो रहा था । स्कूल के बचे कुछ दोस्त जिसके साथ बात हो पा रही थी उनसे बात करके एक दूसरे को अपने अपने दुख बटोर रहे थे , और साथी साथ स्कूल की यादों को साथ ले कर टेंशन को कम कर रहे थे। कोई बोल रहा था कि यार आगे क्या करेंगे क्या हो गा? और उसके साथ साथ ये भी था कि अरे क्या यार क्यूं हो रहा है टेंशन अगर कुछ हुआ भी तो सबका होगा जो हमारा हुआ है तो टेंशन को छोड़ो और जो हो रहा है उसके मजा लो  ।

 जिंदगी का अब एक नया पढ़ाव शुरू होने जाने वाला है , जो हमारी आगे की जिंदगी तेह करेगी । लोगों को ये टेंशन होता था की मार्क्स कैसे आएंगे ? आगे जा कर क्या करेंगे ?और हमारा थोड़ा उल्टा सा था , की यार पास हो जाए तो मानो यही से ही हो गए केदारनाथ के दर्शन ।।

जिंदगी में पापा के ताने खा कर भी कभी सुधरे नहीं वो आज पेपर पढ़ने बैठे थे ये देख कर घरवाले भी चौंक उठे थे की ये चमत्कार कैसे हुआ? पेपर देखने की एक ही वजह थीं की आखिर रिज़ल्ट की तारीख कब आयेगी ? रिज़ल्ट चाहे जो भी हो लेकिन मंजूरे पापा होना चाहिए वरना नतीजा तह था खुदकी दुकान पर लगने की और दुकान का मना कर भी दिया तो पापा नई रीक्षा ला कर देंगे और पुरे शहर में घूमना पड़ेगा और ये स्कीम हमको ना मंजूर थी इससे अच्छा पढाई ही करले ।

जिंदगी का एक नया दौर शुरू होने जा रहा था, सब धीरे धीरे सही हो रहा था लेकीन अब फिर से भगवान को ये खुशी भी देखी ना गई और, एक और दुख दे दिया । रात के करीब करीब ११:४५ हो रहे थे और पापा के फोन कि रिंग बार- बार सुनाई पड़ रही , रात को आया ये फोन कुछ - कुछ अनहोनी सा दिखाई पड़ रहा था । क्योंकि रात को आया हर एक फोन तब ही आता था जब किसिका देहांत हो गया हो या कोई बहुत बीमार हो , फोन बार बार बजने की वजह से मम्मी जग गई थी । फोन उठाते ही मम्मी बिल्कुल चुप सी हो गई , फोन पर फिआ बात कर रही थी और उन्होंने कहा कि दादी जी का देहांत हो गया हैं , ये बात पापा को ना पता चले ये कहा गया था क्यूंकि दादी जी पापा के काफी करीब थी मेरी तरह पापा भी घर मे सबसे छोटे थे ।। दादी मा मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी, मे जब जब गाव जाता था उनसे अपनी सारी बाते करता था ओर वो मुजसे अपनी सारी बाते , दादी की अहमियत वो ही लोग अच्छे से जान सकते है जिसके उपर दादी का साया ना हो , जिसके पास दादी है वो बहुत ही नसीब वाले हैं ये ही मान लो की पूरी जन्नत ही उनके पास है ।। 

दादी की एहमियत क्या है ? ये उनके पोते से अच्छा कोई नहीं बता सकता ! " मूजसे मेरी दुनिया ही छीन चुकी थी " दादी के देहांत की खबर ने मुझे अंदर से इतना तोड़ दिया था कि मेरे अंदर भरे आंसू ही निकाल नहीं पा रहे थे ।।

पापा को दादी की खबर ना सुना कर ये बताता की दादी की तबियत थोड़ी सी खराब थी । लेकीन सबकी आंखों में भरे आंसू आखिर कब तक छुप रह सकते हैं ? जब पापा को अहलियत का पता चला तब उनको संभालना मुश्किल हो गया था । बार - बार आ रही दादी कि हर एक तस्वीर उनके साथ बिताया हर एक वक्त याद दिला रही थी , उनके साथ पोधे को पानी पीला ना , एक साथ दातुन करना, उनको साथ लकड़े के जाड़े बनाना , शाम को लकड़ियां काट कर चूल्हे पर उनके हाथों बनी बाजरे की रोटी खाना , और रात को उन्हीं से राजा- रानी की कहानी सुनना  
ये  सब याद आने लगा था।  

दादी का अचानक से युह छोड़कर जाने की वजह से घर में सब टूट कर बिखर सा गया था , सबको एक साथ समेट ना ना मुश्किल सा था । दादी की अंतिम क्रिया करके घर तो आ गए थे लेकिन घर में दादी की ना होने की विरानियत साफ सी दिखाई दे रही थी , जहां भी देखो उनकी धुंधली सी छबी दिखाई दे रही थी । पापा ने तो खाना पीना तक छोड़ दिया था सबके समझने के बाद थोड़ा बहुत खाया । 

हो भी क्यों न ? हर किसी को अपने जीवन में उनके माता - पिता का स्थान सबसे ऊंचा होता हैं । जिन्होंने चलना , खाना सिखाया , दुनिया के सामने खड़े होना सिखाया और आखिर में उनका साथ सर पे से अचानक से उठ जाए तो तकलीफ तो होती ही हैं , सिर्फ पापा को ही नही हर कोई ये तकलीफ ये दर्द से गुजर चुका हैं तो उनको भी पता है कि क्या महसूस होता है । 

दुनिया के सारे दर्द, दुख और तकलीफ एक तरफ और मा - पापा को खोना एक तरफ अगर चला भी जाए जिंदगी में सब कुछ तो कोई गीला कोई सिकवा नहीं , सब कुछ वापस लाया जा सकता है ता ये बोलो की कमाया जा सकता हैं लेकीन दुनिया में मा - पापा नहीं जाने चाहिए ।।

मेरी जिंदगी में इन्हीं दोनों कि अहमियत एक सी हैं , मेरे लिए दोनों बगैर जीना मुश्किल हैं ।
एक दिल हैं तो एक जान हैं ।

दादी हमारे घर की नीव थी , अगर नीव ही नहीं रही तो मकान कैसे खड़ा रहेगा ! घर के सारे लोग बिखर गए थे । दादी अपने से ज्यादा उनके पेड़ और पौधों से प्यार करती थी । अगर उनके पौधों को अगर किसी ने छुआ भी तो सामत आई समझो । अब जब जब पौधों को पानी देने जाते हैं तब तब उनकी याद आती हैं , दादी की जाने के इतने सालो बाद भी उनकी छवि हर जगह है ।

मेरी जिंदगी की सारी बातें यहां तक की वो बातें भी जो किसी से कर नहीं पाता था वो दादी से करता था  ।  दादी हर एक बार किसी ना किसी मुसीबत की एक नई सलाह देती थी । हर बार कुछ नया सिखाती थी ।। 

लेकीन, सायद अब वो बाते कही दब सी गई है । अब शायद किसी से अपने मन की बात ना हो सकेगी ।। 

दादी आप जहां भी हो , जैसे भी हो आप हमेशा याद आओगे 
I badly missed you dadi  😓💔❤
 



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