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| Tangled Eternity |
खुशी भी हमारे क्लास में पढ़ती थी। हमारी दोस्ती की शुरुआत भी क्लासरूम से हुई थी, लेकिन फिर पता नहीं चला कब फ् दोस्त से अच्छे दोस्त हो गए, हमारे रिश्ते की शुरुआत भी लड़ाई झगडे से हुई थी पर , फिर दिन ब दिन लड़ाई या कम होने लगी और हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए ।।
और केहते हैं ना “ जिस रिश्ते की शुरुआत लड़ाई झगडे से होती हैं वो लंबा चलता हैं ” और शायद अभी भी इसी की वजह से हम अभी भी अच्छे दोस्त हैं ,वो भी मॉनीटर थी लड़कियों की तो जब भी टीचर का ताश ख़तम होने के बाद हम लोग क्लासरूम को संभाल ते , बात किया करते थे , वो आज भी मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं , जितनी पहले भी थी ।।
वो लोग आज भी अंधेरे में है जो ये समझते हैं कि लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते लेकिन हमने उनको गलत ठहरा दिया । मेरा ये मानना हैं कि दोस्त चाहे कोई भी हो लेकिन दोस्त, दोस्त होना चाहिए कभी मतलब के लिए किसी का इस्तेमाल ना करे , जो दोस्ती के लिए कुछ भी करदे और मुझे खुशी है मेरे सारे दोस्त अच्छे हैं कभी मतलब के किए इस्तेमाल नहीं किया।
जिंदगी में ये सीख जरूर लिया की कभी किसी को भुलाने के लिए किसी और का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए वरना फिर दोनों तरफ फस जाओगे, पहले को भुला नहीं पाओगे , और दूसरे को छोड़ नहीं सकते , मैंने भी यही गलती कर दी । मैंने शानवी को भुला ने के लिए मीतू से प्यार किया ,लेकिन मीतू की कद्र तब समझ आई जब वो दूर हुई।। उससे में शानवी को भूल जरूर पाया लेकिन फिर मीतू के प्यार में इतना पागल सा हो गया था कि कुछ और दिखाई ही नहीं दे रहा था फ़िर अंत में वो हुआ जो कभी सपने में भी सोचा नहीं था ।।
शानवी हमारे क्लास की सबसे सुंदर लड़की थी, जितनी सुंदर थी उतनी पढ़ाई में भी अच्छी थीं। जब मुझे ये एहसास हुआ कि में उससे प्यार करने लगा हुआ हूं तो में उससे दूरी बनाने की कोशिश करने लगा और उससे दूर दूर भागने लगा । उससे नफ़रत करने लगा लेकिन हर बार कुछ ऐसा हो जाता था की मेरी सारी नफ़रत कम पड़ जाती थी ।
जब फिर वापस आ कर अपने आप को उन सारी चीजों से दूर करके फिर से पढ़ाई में अपना सारा ध्यान लगा दिया । जब भी कोई टीचर स्कूल में नहीं होता था तो सब लोग मिलकर बाहर खेलने का तय करके किसी न किसी टीचर से बाहर खेलने की इज्जाजत ले ही लेते थे । में पहले से ही बाहर खेलने में आलसी था या तो यूं मानो की खेलना होता था पर खेल नहीं पाता था, कुछ की वजह मम्मी थीं तो कुछ की वजह डॉक्टर । अब कुछ भी हो खेलना तो था ही, इसी दौरान एक दिन सबने मिलकर ' खो- खो ' खेलने का तय किया था , लेकिन मैंने कभी भी ये कैसे खेलते है ये देखा तक नहीं था जब किसी को पूछा तो कहा की अगर कोई पकड़ ने आए तो सिर्फ़ दौड़ ना हैं , फिर जैसे मैदान की और गया तोह सामने से खुशी पकड़ने आ रही थी मुझे लगा कि शुरू हो गया , उसने मुझसे पूरे मैदान के चक्कर लगवा दिया, और फिर जब थक कर बैठा तो उसने बोला की फौल था , ये सुनकर जो गुस्सा आया ना, और पुरे क्लास के सामने खुदका मजाक बना वो अलग बात ।
टीचर की मिमक्र करके सबको हसाना फिर , फिर सज़ा के वजह से बाहर निकल कर सबको परेशान करना ये सब फिर से करके जीतने दिन सबसे दूर रहा उतने दिन का सब सही कर दिया ऐसा महसूस हो रहा था, अब किसी से कोई सिकायत सी नहीं थी , अब जितना समय बचा हुआ था स्कूल ख़तम होने में वो सारा समय दोस्तो के बीच बिताना था ।
क्लास में सारे दोस्त सब एक से बढ़कर एक थे, कोई टीचर का चमचा था तो कोई टीचर का सलाहकार । टीचर को क्या करना चाहिए क्या नहीं वो भी वो लोग बताते थे । जब भी टीचर की क्लास लगती थी तब हमारे बैकबंचर्स के बहाने ही अलग होते थे , कोई जगह के लिए लड़ता था तो कोई एक दूजे को चिडा कर, आम तौर से बेंच पर चार जन बैठ ते थे लेकिन ये सारे लड़ने झगड़ने के लिए पांच लोग बैठ ते थे । और इसकी वजह से टीचर का अंधा समय इनको समझने में चला जाता था और आधा कल दूसरो को समझने में जैसे ही गंटी बजी सीधा बाहर ।। अब एक घंटे की ब्रेक में घर जा कर आ जाना होता था, स्कूल से घर जाने में पूरे १५ मिनिट लगते थे, फिर भी हम लोग आराम से जाते थे और क्लास ख़तम होने तक आ जाते थे तो क्लास भी भरनी पड़ती नहीं थी और शांति से घर खाना खा कर आने को मिलता था ।
क्लास में कम और खेलने को ज्यादा मिलता था, अगर कभी बाहर जाना नहीं भी होता था तो क्लास में ही खेल लेते थे। अजीब सी आवाज़ें निकाल कर गीत वगैरा गाना और दूसरो को गाते वकत चिढाना बहुत मजा आता था ।।
ये पता नहीं था की अब ऐसा माहौल फिर से कभी नहीं मिलेगा, अब ये दोस्त कभी नहीं मिलेंगे, इनके साथ बिताया हर वक्त अब फिरसे कभी नहीं आएगा, स्कूल के आखरी दिन एक दूजे से वादा जरूर किया था कि मिलेंगे एक दिन लेकिन वो वादे भी जूठे निकले, वो बिना मोबाइल वाली जिंदगी ही शायद अच्छी थी जहां बिना किसी टेंशन के साथ सब सही चल रहा होता था, जहां कट्टी- बट्टी होने पर भी सब सही हो जाता था, जहां बिना मतलब के दोस्त थे । सोचा जरूर था एक दिन कि सबको बुला कर वहीं पुराने दिन फिर से याद करेंगे । लेकीन कहां ? आज कल वक्त कहां ? कुछ पढ़ाई में उलझे तो कुछ अपनी जिंदगी में, कुछ कुछ की तो सादी हो कर बच्चे भी हो गए । और हमको देखो ' अभी भी पढ़ाई ' पढाई में उलझे हैं ।।
आज भी वो लोग बहुत नसीब वाले हैं कि जिसके साथ उनके बचपन के और स्कूल के दोस्त साथ हैं । क्यूं न नए दोस्त हजार बना ले लेकिन मुश्किल वक्त तो वो ही पुराने कमिने ही याद आते हैं , जो भले ही दुख दूर नहीं कर सकते लेकिन उससे बाहर निकल ने के लिए ऐसे ऐसे सॉल्यूशन निकालते हैं की हम अपनी मुसीबत, अपना दुख भूल जाते हैं ।।
आज ये ' Friendship Special story ' पढ़ कर अपने पुराने कमिने जरूर याद आयेंगे । अगर कोई भूल भी गया हो तो सारे गीले सिकवे भुला कर उनको माफ जरूर कर देना हमारे गुजराती में एक कहावत हैं “ છોરું કછોરું થાય પણ માવતર કમાવતર ન થાય ” ये कहावत का यही मतलब हैं की चाहे बच्चे कितनी भी गलती क्यूं न करदे लेकिन मा- पापा कभी उनके जैसे नहीं होते हैं वो उनकी सारी गलती माफ कर देते हैं। अब सब समझने की भी आपको जरूरत नहीं हैं ।।
अगर कोई भूल भी जाए तो एक थप्पड़ लगा कर बोलना जरूर
“ तेरा यार हूं मैं ☺ ”

😊🤩 unbelievable moment's
ReplyDeleteSupperb🔥
ReplyDeleteTera yarr hu me
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