| Image Courtesy : thesechapters |
“ फूल भी
खिलता हैं श्पर्श से तुम्हारा,
सूरज भी ठंढक हें आभाष से
तुम्हारा,
लोंग कहते हैं की तुम
टुकड़ा हो चाँद का,
लेकिन, मेरे लिए चाँद भी टुकड़ा हैं तुम्हारा
“ ~Tapan Dixit
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“ फूल भी
खिलता हैं श्पर्श से तुम्हारा,
सूरज भी ठंढक हें आभाष से
तुम्हारा,
लोंग कहते हैं की तुम
टुकड़ा हो चाँद का,
लेकिन, मेरे लिए चाँद भी टुकड़ा हैं तुम्हारा
“ ~Tapan Dixit
Bdhiyaa💯
ReplyDelete💯💯❤️
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