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| Tangled Eternity |
Friendship -1
Now, I completely say this ' I moved on ' इतने दिनों बाद स्कूल न जाने की वजह से बहुत कुछ पीछे छूट सा गया था । जैसे एक दो साल सब पीछे हो गया हो ।। जो सब हुआ अब वो फिर से दोहराना नहीं हैं, ऐसा वादा खुद से किया था , चलो जो हुआ सो हुआ अब नई शुरुआत करते हैं।।
और अगर नई शुरुआत करनी हैं तो क्यूं ना वो स्कूल से की जाए, और स्कूल की बात जब जब होती हैं तो उसमे वो कमिने दोस्त की बात ना हो ऐसा कभी हो सकता है भला ।
आप सब कि तरह मेरे स्कूल के दिन भी बहुत रंगीन से थे।
स्कूल में बहुत से दोस्त थे, कुछ मासूम से, तो कुछ मासूमियत के डोंगी, तो कुछ टीचर के सलाहकार, तो कुछ टीचर के खास, ओर इन सब में हमारी त्रिपुटी अलग सी थी ,सब की क्लास में एक ना एक देवदास होता ही हैं ।। और ऐसा एक देवदास हमारे क्लास में भी था और उसकी पारो हमारे क्लास में ही थी, और जैसा कि आप सब लोग जानते हो , पारो कभी देवदास की नहीं हो सकती उनकी कहानी का भी अंत होने ही वाला था बहुत जलद, और इन सब दोस्तो को याद करते करते में पहुचा अपने क्लास की ओर !
पहुंच कर जब देखा सबकी तरफ़ तो मानो सब ऐसा देख रहे हो कि कोई मुर्दा फ़िर से जिंदा हो कर वापस आ गया हो इतने दिन न आने कि वजह से हमसे हमारे जिंदा होने का सबूत मंगवाया गया था, और वो था ' मेडीकल सर्टिफिकेट ' ये सब स्कूल के नियम थे और सबसे ज्यादा इन सबका कलेक्शन मेरे पास था, वो फिर चाहे छुट्टी का लेटर हो या सर्टिफिकेट क्लास में सबसे ज्यादा छुट्टी रखी हो तो वो में था।
दिन कि शुरुआत होती थी गणित से, जो कि हमारे क्लास के टीचर पढ़ाते थे, और अगर दिन कि शुरुआत ही ऐसी होती थी तो सबको पता होगा की कैसे बीत ता होगा दिन, सबकी तरह मेरी गणित इतनी अच्छी नहीं थी, मेरा ओर गणित का दूर दूर से कोई रिश्ता नहीं था और शायद आगे भी ये रिश्ता ऐसा ही रहेगा आज तक का मेरा रिकॉर्ड है कि गणित का होमवर्क मेरे से कभी नहीं हुआ, चाहे टीचर लाख ताने तोसे दे दे लेकिन गणित का होमवर्क कभी पूरा नहीं होता था ऊपर से इतना होमवर्क होता था कि हाथ छुट्टी पे चले जाए। ये सब कि हमको कोनसी परवाह है हमने कोनसा किया हैं कभी ये तो बात हुई गणित की ये तास तो हो भी जाता था और इसके बाद इंगलिश की क्लास लगती थी उन दिनों इंगलिश इतना नहीं होता था जितना अब होता है, इंगलिश का भी यही हाल था जैसा गणित का हैं, हमारे बाबूजी को कभी नहीं आया तो कैसे हमको आएगा, बचपन से भागते फिरते इंगलिश से पता नहीं था बड़े हो कर इससे फिर से मुलाकात होगी और कभी सोचा भी नहीं था भला हमको कोनसा विदेश जाना हैं तो हम सीखेंगे ये सोचकर कभी इंगलिश किया नहीं, और आज यहीं इंगलिश ले रहा हैं । “ जब जब जिस चीज़ से भागते हैं वो चीज़ कभी ना कभी हमारे सामने आही जाती हैं वो फिर चाहे हमारा डर हो या परेशानी ” ये दुनिया एक साइकिल के पैये सी हैं घूम फिर के वहीं आ कर रुकती हैं जहां से शुरुआत की हो ।।
स्कूल में हम ठहरे बैकबेंचर्स कभी भी आगे बैठ ने कि जिद्द नहीं की , और जिद्द करते भी क्यूं जहान से पूरे क्लास का व्यू दिखाई दे रहा हो, कोन कोन क्या कर रहा हैं किसका किसके साथ सोना- बाबू चल रहा है ये सब यही से तो दिख ता था, और कितना भी मस्ती कर लो कभी कोई टेंशन नहीं होता था , जानवरो की आवाज़ निकाल ने पर भी टीचर को पता नहीं चलता था और ऐसी जन्नत जैसी जगह हम भला क्यू छोड़ते ?.
हमारे मित्र थे बड़े मासूम शक्ल के कमीनों को भी पीछे छोड़ दे ऐसे मित्र जिनका नाम था ' नील ' भोले भाले नाम वाला सबसे बड़ा कमिना था। परीक्षा के दौरान हमारे साथ खेलने वाला और रात रात को पढ़ने वाला ये , पूछ ने पर भी कुछ नहीं बताता था , उसको फ़िज़ूल सी बात पर भी हसने कि आदत सी थी , जब भी चेहरे पे देखो तब हस्ते ही रहता था , होमवर्क में काट काट कर लिखने में तो सर्वश्रेष्ठता हासिल की हो इतनी सफ़ाई से लिखता था कि टीचर की आंखो में भी धूल जोंक दे ।
एक और हमारे ग्रुप के कद में सबसे छोटे और कमीनों के भी सरदार थे, शुरू होते ही ख़तम हो जाने वाला कमीना -२ जिससे कमिनापन की सारी हद पार की हुई थी , नाम था
'बिपिन ' इससे टीचर को भी परेशान करने में बक्षा नहीं था । दिखने में सबसे छोटा था पर लड़ने में बडो से भी भीड़ जाता था, हालाकि मार खा कर वापस आ जाता था पर खुदको कभी कम नहीं समजता था वो क्या कहते हैं “ जान जाए तो जाए पर नवाबी कभी ना जाए ” इनको थोड़ा पॉज़िटिव वे में लेना हैं ।।
जब भी बोर्ड पर लिखने जाने पर पीछे से अलग अलग आवाजे निकाल कर सर को परेशान करता था, क्लास में ऐसे रहता था मानो स्कूल ही उसके पापा का हो ।। अब जब क्लास के मॉनिटर के पद के लिए चुनाव होने वाला था तब इन सब ने मुझे बिना मतलब के घुसा कर बिना किसी कैंडिडेट के जीता दिया था ।। पता नहीं कमीनों के दिमाग़ में क्या चल रहा था जो मुझे मॉनिटर बनवा दिया पूछने पर कमीनों ने अपने बचाव के लिए मुझे जंग में खड़ा किया था ताकि अगर इनका नाम आए तो मे इन्हे बचा लू ।
बिगबॉस के घर में जितने झगड़े नहीं होते थे इतने ये लोग करते थे और फिर पूछने पर मुझे आगे कर देते थे ।। रोज़ रोज़ नए नए तरीकों से परेशान करते थे।
अब आते हैं ' देवदास ' की ओर ! पता नहीं उसको अपना प्यार मिला या नहीं । इसको चिढाने में अलग ही मजा आता था । कमिने ने बोला था कि अगर उसको अपना प्यार नहीं मिला तो इसी क्लास में लटकर अपनी जान दे देगा ओर कमीना अभी तक जिंदा हैं ।।

Hum first 👍🏻👍🏻👍🏻
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